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Wednesday, 19 June 2013
मोदी गुजरात के किसानो की चिंता करे
नरेद्र मोदी को ये कौन समजायेगा की वो दिल्ही की चिंता छोड़ कर गुजरात के किसानो की चिंता करे.मोदी के सामने कल सुरेन्द्रनगर और पाटन के किसानो ने हांसलपुर SIR के विरोध में गांधीनगर तक ट्रेक्टर रेली नीकाली.लेकिन मोदी को किसानो की चिंता नहीं है.किसान गांधीनगर में अपनी जमीन के लिए लड़ रहे थे और मोदी दिल्ही में आडवानी के साथ गुपचुप कर रहे थे.मोदी बिहार की चिंता कर रहे है, मोदी up की चिंता कर रहे है, मोदी राजस्थान की चिंता कर रहे है लेकिन उनको गुजरात के किसानो की चिंता क्यों नहीं होती.तिन लाख बीघा खेतो की जमीन मोदीने SIR में सम्पादित कर दी.जिसके सामने किसान अपना विरोध जता रहे है और SIR हटाने की बात कर रहे है, SIR नहीं हटायेगे तो सरकार हटाने का किसानो ने फेंसला कर लिया है.बात ये है की अहमदाबाद, सुरेंद्रनगर, पाटन और मेहसाणा जिले के 70 गांवों में 50.884 हेक्टेयर जमीन को बहुचराजी-मांडल में सरकार ने विशेष निवेश रीजन की अधिसूचना प्रकाशित करके रातोंरात भाजपा विधायकों, मंत्रियों और भाजपा पदाधिकारिओं की मिलीभगत से किसानों की जमीन पर सस्ते दाम खरीद, करोड़ों डॉलर कमाने के लिए ""सर"" का लेबल चिपकाने का खेल होने का दावा खुले तौर पर किया जा रहा है. पिछले दो - तीन साल से गृह राज्य मंत्री रजनी पटेल, मांडल के विधायक रह चुके प्रागजीभई पटेल, कमाभई राठोड आदि नेताओं ने मेलमिलाप में छोटे गरीब किसानों से उनकी महेंगी जमीन सस्ते दामों में खरीद ली थी. भाजपा महासचिव शंकर चौधरीने भी किसानो को अँधेरे में रखकर पाटन और सूरत भाजपा विधायकों, उच्च पदाधिकारिओं के साथ मिलजुल कर जमीनें खरीदकर किसानों को ठगा है. कुछ स्थानीय किसानों के पास भूमि बची है और वे अभी भी अपनी जिम खेती के सिवा किसी को देने के लिए नहीं राजी नहीं है. फिर भी भाजपा के पदाधिकारी, मंत्रिओं और विधायकों के मेलमिलाप में गरीब किसानों को परेशान किया जा रहा है.किसान जमीन देने को तैयार नहीं है और मोदी के मंत्री और विधायक कसानो को सुनने के लिए तैयार नहीं है.किसानो ने तय कर लिया है की वो मरते दम तक इसका विरोध करेंगे और SIR नहीं होने देंगे.सायद मोदी को इन किसानो की चिंता नहीं है.मोदी को दिल्ही की चिंता है.
Tuesday, 18 June 2013
જાન દેંગે, જમીન નહીં, મહુવા સત્યાગ્રહ - એક નજર, ડોળિયાથી ગાંધીનગર ૩૫૦ કિલોમીટરની પેસેન્જર યાત્રા
બે વર્ષથી ચાલી રહેલા અહિંસક આંદોલનના મળવા જેવા મહિલા ક્રાંતિકારી કડવીબેન
આહા!!! કેટલી નિર્દોષતા વચ્ચે પણ આક્રોશ
સમાયેલો દેખાય છે.
જમીન તો રહી નથી,
હવે સુ કામનું જેસીબી!!!
| આયા મોસમ ઠંડે ઠંડે તરબૂચ ખાને કા..... |
અને છેલ્લે
| ગામની જમીન ગામની, સરકારની નહીં.જાન દેંગે, જમીન નહીં |
એક નજર આ તરફ પણ....
અહેવાલ સંકલન દિપેન પઢિયારમોદીએ આપેલા જવાબો પરથી તમને નથી લાગતું કે મોદીને જ હટાવવાની જરૂર છે એવું.......
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